Wednesday, April 11, 2007

अकेले चलो तुम्………

न हो साथ कोई अकेले चलो तुम
सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी

बिना पंख वाले उड़े जो गगन में
न संबन्ध उनके गगन से रहे हैं
अगर उड़ सको तो पखेरू बनो तुम
सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी

वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाए उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी

रचनाकार … (अज्ञात)

(जब भी कभी मन मे अवसाद / असफलता मह्सूस हो… ये पंक्तियाँ मुझे हमेशा से प्रेरित कारती रही हैं, और मुझे आगे बढ़ने में मदद करती रहती हैं।)

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